करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान: निरंतर प्रयास की अद्भुत शक्ति
भूमिका “करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत-जात ते सिल पर पड़त निशान।” यह प्रसिद्ध दोहा महान कवि संत कबीरदास का है। इसका अर्थ …
भूमिका “करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत-जात ते सिल पर पड़त निशान।” यह प्रसिद्ध दोहा महान कवि संत कबीरदास का है। इसका अर्थ …
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